Bhagavad Gita saar with Lyrics Part – 1

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Bhagavad Gita saar with Lyrics
Bhagavad Gita saar with Lyrics

Bhagavad Gita saar with Lyrics
Bhagavad Gita saar with Lyrics

यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युथानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम् |
परित्राणाय साधुनाम विनाशाय च: दुष्कृताम, धर्मं संस्थापनार्थाय सम्भावामी युगे युगे ||

Whenever there is decline of Dharma (righteousness)..and rise of Adharma (unrighteousness);
To protect the virtuous..to destroy the wicked and to re-establish Dharma,
I manifest myself, through the ages.

yada yada hi dharmasya
glanir bhavati bharatah
abhyutthanam adharmasya
tadatmanam srijamyaham
Paritranaay Sadhunaam
Vinashay cha dushkritam
Dharma Sansthapanarthay
sambhawami yuge yuge
sambhawami yuge yuge
sambhawami yuge yuge

MahaBharat Ka Yudh Hai Divya Hai Gita Gyan
MahaBharat Ka Yudh Hai Divya Hai Gita Gyan

Hai Katha Parmarth Ki Kahe Krishna Bhagwan
Hai Katha Parmarth Ki Kahe Krishna Bhagwan

Vifal Hue Sabke Jatan Jab Bhacha Na Koi Dvyar
Vifal Hue Sabke Jatan Jab Bhacha Na Koi Dvyar

Ab Karenge Faisla Teer Dhanush Talwar Re Bhakto
Ab Karenge Faisla Teer Dhanush Talwar Re Bhakto

Sanjay Se Dhritrast Bole Hame Sunao Haal
Sanjay Se Dhritrast Bole Hame Sunao Haal

Kaha Khadi Dono Senai Le Dhanush Aur Bhal
Kaha Khadi Dono Senai Le Dhanush Aur Bhal

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GITA SAAR

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GITA SAAR
GITA SAAR

GITA SAAR
GITA SAAR

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो? किससे व्यर्थ डरते हो? कौन तुम्हें मार सक्ता है? अात्मा ना पैदा होती है, न मरती है।
जो हुअा, वह अच्छा हुअा, जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। तुम भूत का पश्चाताप न करो। भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? न तुम कुछ लेकर अाए, जो लिया यहीं से लिया। जो दिया, यहीं पर दिया। जो लिया, इसी (भगवान) से लिया। जो दिया, इसी को दिया।

खाली हाथ अाए अौर खाली हाथ चले। जो अाज तुम्हारा है, कल अौर किसी का था, परसों किसी अौर का होगा। तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।

परिवर्तन संसार का नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।

न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, अाकाश से बना है अौर इसी में मिल जायेगा। परन्तु अात्मा स्थिर है – फिर तुम क्या हो?

तुम अपने अापको भगवान के अर्पित करो। यही सबसे उत्तम सहारा है। जो इसके सहारे को जानता है वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त है।
जो कुछ भी तू करता है, उसे भगवान के अर्पण करता चल। ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्त का अानंन्द अनुभव करेगा।

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