तेरे सर पर गंगा की धारा माथे पे चाँद चकोरा

तेरे सर पर गंगा की धारा
माथे पे चाँद चकोरा
गूंजे है नाद शम्भू नाथ रे।।

जय जय भोले नाथ शम्भू
महादेव शिव शम्भू
जय जय भोले नाथ शम्भू
महादेव शिव शम्भू।।

मन में बसा रूप तेरा कितना सुन्दर है
कितना सुन्दर है
आदि ना अंत है सबके अंदर है
पी कर के विष का प्याला
दुनिया को अमृत दे डाला।।

तेरे सर पर गंगा की धरा
माथे पे चाँद चकोरा
गूंजे है नाद शम्भू नाथ रे।।

जय जय भोले नाथ शम्भू
महादेव शिव शम्भू
जय जय भोले नाथ शम्भू
महादेव शिव शम्भू।।

द्वार दया के खोलो
हमको तेरा सहरा है
तेरा सहरा है
भाव सागर हो पार
दिल ने तुम्हे पुकारा है
करो कृपा त्रिशूल धारी
तुम भक्तो के रखवारी
तुमको पूजे दुनिया सारी भोले नाथ जी।।

तेरे सर पर गंगा की धरा
माथे पे चाँद चकोरा
गूंजे है नाद शम्भू नाथ रे।।

सिंगर – अगम अग्रवालजी

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