युगों युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है
युगों युगों से यही हमारी, बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है मगर नहीं दी, कभी देश की माटी है युगों युगों से यही हमारी.. इस धरती ने जन्म दिया है, यही पुनिता माताहै एक प्राण दो देह सरीखा, इससे अपना नाता है यह पावन माटी ललाट की ललित ललाम लालटी हैखून दिया है मगर नहीं … Read more