अपना मुझे बना लो मेरा और ना सहारा
अपना मुझे बना लो, मेरा और ना सहाराचरणों से दूर रहकर, कैसे करूँ गुज़ारा।। दिल की किसे सुनाएँ ख़ुदग़र्ज़ यार सारेजिसको भी अपना समझा उसने ही ताने मारेसुन भी लो अब कन्हैया कोई नहीं हमारा।। खुशियाँ थी जिनसे बाँटी ऐसा भी मोड़ आयाज़ख़्मों पे जख्म देकर दिल को बहुत रुलायातेरे होते मैं कन्हैया फिरता हूँ … Read more