थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में
ज्योत जली दुनीयाँ भर में,तेरी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,मोरे खाटू जी सरकार,थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में।। शीश को है तू दानी,सारी दुनीयाँ ने मानी,थे तो तीन बाण हो धारी,थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में,मोरे खाटू जी सरकार,थारी ज्योत जली दुनीयाँ भर में।। फागुन को है यो महीनों,बाबा को लाग्यो है मेलो,सारे भर भर … Read more