रंग डारी मैं कनुआ कारे ने रंग डारी
बरसाने अचानक श्याम गया लिएलाल गुलाल की सुन्दर झोलीलखि कुंजन में वृषभानु सुतावह झोली मनोहर धीरे से खोलीदृग मीच गुलाल लगाए दियोहुई धोखे से आज ये अजीब ठिठोलीअब और विशेष ना छेड़ो इसेमन मोहन होनी सी थो मैं होली।। रंग डारी मैं कनुआ कारे ने रंग डारीरंग डारी मैं कनुआ कारे ने रंग डारी।। रंग … Read more