गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारी
गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारीइतनी विनय हमारी वृंदा विपिन बसा दे।। गोपाल बंशी वाले बृज रज बृज बिहारीइतनी विनय हमारी वृंदा विपिन बसा दे।। कितने डरो पे भटके कितने ही घर बनायेअब तेरे दर पे आके जाए ना फिर निकले।। जोड़ी तेरी हमारी पहले रचि विधाताहो तुम भी रंग के कालेतो हम भी … Read more