रूप सलोना देख श्याम का सुधबुध मेरी खोई नी मैं कमली होई
रूप सलोना देख श्याम का सुधबुध मेरी खोई,रूप सलोना देख श्याम का सुधबुध मेरी खोई,नी मैं कमली होई नी मैं कमली होई,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली,कमली श्याम दी कमली।। सखी पनघट पर यमुना के तट पर,लेकर पहुंची मटकी,भूल गई सब एक बार जब,छवि देखि नटखट की,देखत ही मैं हुई बाँवरी,उसी रूप में खोई,नी … Read more