मेरी बिगड़ी बनाने में क्यों देर लगाई है
दर दर भटक लिया तेरे दीदार के लिए,और चुन चुन कर फूल लाया हूँ तेरे हार के लिए,अब तारो या न तारो ये मर्जी तुम्हारी है,ज़माने की खाई ठोकरे तेरे दरबार के लिए,फरियादी है खामोश मगर ज़िद पे अड़ा है,दीवाना बड़ी देर से तेरे दर पे खड़ा है।। आवाज़ देगी मैया मैं इंतेज़ार में बैठा … Read more