छत्र देखती ना माँ चुनरिया देखती
छत्र देखती ना माँ चुनरिया देखती,भाव अपने भक्त का मेरी मैया देखती।। माँ भला कब किसी का क्या खाये,सारी दुनिया को वो तो खिलाये,भाव की माँ की भूखी खाने रूखी सुखी,छोड़ के भोग छप्पन चली आये,माँ तो बस खिलने का नजरिया देखती।। छत्र देखती ना माँ चुनरिया देखती,भाव अपने भक्त का मेरी मैया देखती।। माँ … Read more