मेरो मन अनत कहां सुख पावै
मेरो मन अनत कहां सुख पावै Mero Mann Aananat Kaha Sukh Paave मेरो मन अनत कहां सुख पावै।जैसे उड़ि जहाज कौ पंछी पुनि जहाज पै आवैमेरो मन अनत कहां सुख पावै।। कमलनैन कौ छांड़ि महातम और देव को ध्यावै।परमगंग कों छांड़ि पियासो दुर्मति कूप खनावैमेरो मन अनत कहां सुख पावै।। जिन मधुकर अंबुज-रस चाख्यौ, क्यों … Read more