शिव के जयकरे लगाते चलो
रिमझिम वर्षा की है फुहारेबम बम भोले के जयकारे कंधे पे कावड़ उठाके चलोशिव के जयकरे लगाते चलो आटा जब सावन का महिनामन हर्षित हो जाता है भोले शंकर की भक्ति मेंजिया मेरा बस जाता है शिव प्रेम की गंगा बहते चलोशिव के जयकरे लगते चलो रावण जब कावड़ भर लायालंका उसे पाई थीपरशुराम ने … Read more