कदम तो राखो काशी में तर जाओगे काशी में

कदम तो राखो काशी में
तर जाओगे कशी में

रात गंगा की लहर हिलोरत रवि आवत कशी में
कण कण दौलत घंटा मंत्र शंकर अविनाशी में

कदम तो राखो काशी में
तर जाओगे कशी में

पांडा घंटा भांग धतूरा
लटकत चारो कोना

छनत कचोरी कटत जलेबी
बजट कड़ाही पौना

कदम तो राखो काशी में
तर जाओगे कशी में

मस्त मलंगो की ये भीड़ है
सब है देखो दीवाने
खैनी ठोकत पान फुलावट
लूटत सारे खजाने

कदम तो राखो काशी में
तर जाओगे काशी में

माँ असंग भौ काल फेकते
काम बनावट अपना
हंस हंस के ई गरियावत है
जैसे कोई अपना


कदम तो राखो काशी में
तर जाओगे काशी में

सब दर्शन ये रोज जियत है
इन्हे कुछ न सिखलाना
भांग छान दुई जारी देते
शिव पर ध्यान लगाना
बुध कबीर की खुसबू में
यहाँ तुलसी की चौपाई
हर्ष चंद्र का जीवन
जहा सच पर आंच ना आयी
कदम तो रखो काशी में
तर जाओगे काशी में

जीवन का यहाँ मर्म समझते
जो मरघट के सन्यासी
जनम मरण के पार बसी
ये है अपनी नगरी काशी
ये है अपनी नगरी काशी
कदम तो रखो काशी में
तर जाओगे काशी में

इन शिव भजन को सुने –

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