कान्हा और कोई नहीं मेरा
मनमोहन घनश्याम जी आन सवारो काजलूट ना जाऊ आज में रखो मेरी लाज।। सावरे कान्हा तू मेरी लाज बचाले लाज बचालेकी और मेरा कोई नहीपर्दा ना उठे मुझे दुनियाँ से उठा ले दुनियाँ से उठा लेकी और मेरा कोई नहीं।। पंचो में दे बैठी जिनको अपना हाथ मेंपाँच पति पाकर भी रह गई अनाथ मेंहार … Read more