सांसों की डोरी से बांध दूंगी तुमको श्याम
सांसों की डोरी से बांध दूंगी तुमको श्याम Sanso Ki Dor Se Bandh Dungi Tumko Shyam समझी नहीं मैं यह कैसा दस्तूर हुआ है,मैं पास जितनी आई तू उतना दूर हुआ है।। सांसों कहां की डोरी से बांध दूंगी तुमको श्याम,जाने न दूंगी कहीं मैं तुमको कही घनश्याम,सांसों की डोरी से बांध दूंगी तुमको श्याम।। … Read more