मुझपे अहसान है माँ जो तेरे सौ जनम मैं चूका न सकूंगा
चोट मुझको लगी दर्द तुझको हुआतेरी हर सांस ने मुझे माँ दुआ लेती अपने सर सारी बलए मेरीतेरी ममता ने जब मेरा माथा छुआ।। तुमसे पहले कभी रब के आगेसर मैं अपना झुका न सकूंगामुझपे अहसान है माँ जो तेरेसौ जनम मैं चूका न सकूंगामेरी हर सांस है कर्ज है तेरामैं कभी ये भुला न … Read more