माँ एक बार तो आओ मेरी विनती मान भी जाओ
माँ एक बार तो आओ मेरी विनती मान भी जाओइस निर्धन की कुटिया के भी सोये भाग जगाओ।। ना रेशम के आसन है न मेवे और मिठाईभेट चडाने को नही कुछ भी पास मेरे महामाईचिंतपूर्णी मैया मेरी चिंता मेरी आप मिटाओरुखा सुखा जो भी बना है भोग उसी का लगाओमाँ एक बार तो आओ मेरी … Read more