मंद मंद मुस्काये रे भोला काहे भांग धतूरा खाये
मंद मंद मुस्काये रे भोला काहे भांग धतूरा खाये,समुन्द्र मंथन में जब दुनिया में जहर फैला था,पी के विष का प्याला तूने दुनिया को बचाया था,कंठ हुआ जब नीला कंठ हुआ जब नीला ,भोला तू तो नील कंठ कहलाये,मंद मंद मुस्काये रे भोला काहे भांग धतूरा खाये।। मैं तेरा सेवक हूँ बाबा कर भी दूँ … Read more