हम पंछी परदेशी मुसाफ़िर आये हैं सैलानी
हम पंछी परदेशी मुसाफ़िर आये हैं सैलानी Hum Panchhi Pardeshi Musafir Aaye Hai Sailani कबीर मन पंछी भया भावे तो उड़ जाय,जो जैसी संगती करें वो वैसा ही फल पाय,कबीर तन पंछी भया, जहां मन तहां उडी जाइ,जो जैसी संगती कर, सो तैसा ही फल पाइ,हम वासी उन देश के, जहाँ जाती वरण कुल नाहीं,शब्द … Read more