मेरा शंकर त्रिपुरारी सारे जग से निराला है
मेरा शंकर त्रिपुरारी सारे जग से निराला हैकैलाश का वासी है वो तो डमरू वाला है मस्तक सोहे चंदा और जटा में गंगा हैतन पर भागम्भर है गल सर्पो की माला हैमेरा शंकर त्रिपुरारी सारे जग से निराला है योगी है भोगी है वो भस्म रमाता हैभूतो का नाथ है वो पीता भंग प्याला हैमेरा … Read more