रोती थी कभी अँखियाँ हमारी
रोती थी कभी अँखियाँ हमारी Roti Thi Kabhi Ankhiyan Hamari रोती थी कभी अँखियाँ हमारीश्याम ने दी हैं खुशियां सारीरंग लिया है अपने रंग मेंमहक रही है ये फुलवारीसाथी है साथी कन्हैया है मेरीनैया का मांझी है मांझी ये साथी जब से शरण में आये हैं हमतुमने मिटाये सारे भरमआई है बहारें आई हैंमस्ती के … Read more