दर दर न भटका संवारे
दर दर न भटका संवारे,पार लगा दो नैया मेरी बीच भावर अटकादर दर न भटका संवारे।। भाई बंधू कुटंब कबीले देखे लिए मैंने सारे,वो क्या मुझको देंगे सहारा जो किसमत के मारे,जिसका हाथ पकड़ना चाहा,उसने ही झटकादर दर न भटका संवारे।। जिस जिस दर मैंने हाथ बडाया सब ने ही ठुकाराया,इसीलिए सब छोड़ जमाना तेरा … Read more