हनुमत डटे रहो आसन पर जब तक कथा राम की होय
हनुमत डटे रहो आसन परजब तक कथा राम की होय।। माथे इनके मुकुट विराजेकानन कुंडल सोहेएक काँधे पर राम विराजेदूजे लक्ष्मण होय।। एक काँधे पर मुगदर सोहेदूजे परवत होयलड्डुअन का तेरो भोग लगत हैहाथ पसारे लोग।। तुलसीदास आस रघुवर कीहरि चरनन चित होयअंग तुम्हारे चोला सोहेलाल लंगोटा होय।। हनुमत डटे रहो आसन परजब तक कथा … Read more