कान्हा तेरी आशिक़ मैं बन जाउंगी

कान्हा तेरी आशिक़ मैं बन जाउंगीकान्हा ज़रा धीरे से खोलो किवाड़।। सोने के लोटे में गंगा जल पानीपी के पीला के चली जाउंगीकान्हा धीरे से खोलो किवाड़।। पीक पीला के चली जुआंगीज़रा धीरे से खोलो किवाड़।। सोने की तली में भोजन परोसाख़ाके खिलके चली जौंगीज़रा धीरे से खोलो किवाड़कान्हा ज़रा धीरे से खोलो किवाड़।। पत्तो … Read more