श्याम जो देता ना मुझको सहारा होता कभी न पार किनारा
श्याम जो देता ना मुझको सहाराहोता कभी न पार किनाराश्याम जो देता ना मुझको सहारा।। उजड़ गयी थी ज़िन्दगी श्याम मेरीजो होती ना मुझपे नज़र तेरीपतझड़ था ये मेरा जीवन साराहोता कभी न पार किनाराश्याम जो देता ना मुझको सहारा।। आयी मुसीबत अपनों ने साथ छोड़ दियामैंने जिसकी और भी देखा उसी ने मुख मोड़ … Read more