मैं खाटू आ गया जी मन्ने सुनी बड़ी दरबार की
मैं खाटू आ गया जी मन्ने सुनी बड़ी दरबार की,मैं खाटू मैं खाटू मैं खाटू आ गया जी।। खाटू आके मन्ने देखा भीड़ पड़ी थी भारी,दूर दूर से आवे आड़े बालक नर और नारी,सब की आस पुगावे जब में बड़ा है दानी,इसीलिए सब बोले इसने बाबा शीश का दानी बाबा लखदातारी,मैं खाटू आ गया जी … Read more