ग्यारस की ग्यारस हर बार जाता हु मैं श्याम के द्वार
ग्यारस की ग्यारस हर बार जाता हु मैं श्याम के द्वार,पर मुझको घर बैठे ही ऐसा लगता है कई बार ,खाटू गए बगैर मुझे श्याम मिल गया।। मिल जाता है मुझे अगर अँधा लंगड़ा रस्ते पर,उसे सहरा देकर मैं पौंचता जब उसे घर,लगता है इक निशान मेरा आज चढ़ गया,खाटू गए बगैर मुझे श्याम मिल … Read more