विश्वंभरी स्तुति – विश्वंभरी अखिल विश्वा तनी जनेता
विश्वंभरी अखिल विश्वा तनी जनेताविधया धरी वदंमा वसजो विधाता डोर बुधहिने डोर करी साद बुद्धि आपोमामपाही ओम भगवती भावा दुखा कापो भूलो पड़ी भावरने भतकु भवानीसुज़े नही लगीर कोई दिशा जवानी भासे भयंकर वाली मान ना उटापोमामपाही ओम भगवती भावा दुखा कापो आ रनकने उगरव नाती कोई आरोजन्मान्ड च्छू जननी हू ग्राही बाल तारो ना … Read more