भारत की जैसी माटी है कही भी नहीं

मन कहे रूक जा रे रूक जा, यह हसीन है जमीं,भारत की जैसी माटी, है कही भी नहीं,भारत की जैसी माटी, है कही भी नहीं।। अरे मन कहे झुक जा रे झुक जा, यह हसीन है जमीं,भारत की जैसी माटी, है कही भी नहीं।। यहाँ हिमालय जैसा पर्वत, शंकर का कैलाश,बहे जहाँ गंग की धारा,मथुरा … Read more

रक्त शिराओं में राणा का रह रह आज हिलोरे लेता

रक्त शिराओं में राणा का, रह रह आज हिलोरे लेता,मातृभूमि का कण कण तृण तृण, हमको आज निमंत्रण देता वीर प्रसुता भारत माँ की, हम सब हिन्दु है संताने,हर विपदा जो माँ पर आती, सहते हैं हम सीना ताने,युग युग की नीद्रा को तज कर, युग युग की नीद्रा को तज कर,फिर से अपना गौरव … Read more

वही प्रेरणा पुंज हमारे स्वामी पूज्य विवेकानंद

जिनके ओजस्वी वचनों से, गूंज उठा था विश्व गगन,वही प्रेरणा पुंज हमारे, स्वामी पूज्य विवेकानंद।। जिनके माथे गुरुकृपा थी, दैविक गुण आलोक भरा,अद्भुत प्रज्ञा प्रकटी जग में, धन्य धन्य यह पुण्य धरा,सत्य सनातन परम ज्ञान का, जो करते अभिनव चिंतन,वही प्रेरणा पुंज हमारे, स्वामी पूज्य विवेकानंद।। जिनका फौलादी भुजबल था, हर संकट में सदा अटल,मर्यादित … Read more

मनुष्य तू बडा महान है

धरती की शान तू है,मनु की संतान,तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,मनुष्य तू बडा महान है,भूल मत मनुष्य तू बडा़ महान है।। तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड … Read more

यह कल कल छल छल बेहती क्या कहती गंगा धारा

यह कल कल छल छल बेहती,क्या कहती गंगा धारा,युग युग से बेहता आता,यह पुण्य प्रवाह हमारा,यह पुण्य प्रवाह हमारा।। हम इसके लघुतम जल कण,बनते मिटते है कण कण,अपना अस्तित्व मिटा कर,तन मन धन करते अर्पण,बढते जाने का शुभ प्रण,प्राणों से हमको प्यारा,यह पुण्य प्रवाह हमारा,यह पुण्य प्रवाह हमारा।। यह कल कल छल छल बेहती,क्या कहती … Read more

युगों युगों से यही हमारी बनी हुई परिपाटी है

युगों युगों से यही हमारी, बनी हुई परिपाटी है,खून दिया है मगर नहीं दी, कभी देश की माटी है युगों युगों से यही हमारी.. इस धरती ने जन्म दिया है, यही पुनिता माताहै एक प्राण दो देह सरीखा, इससे अपना नाता है यह पावन माटी ललाट की ललित ललाम लालटी हैखून दिया है मगर नहीं … Read more

सौगंध राम की खाते हैं भारत को भव्य बनाएंगे

कोटि कोटि हिन्दुजन का, हम ज्वार उठा कर मानेंगे,सौगंध राम की खाते हैं, भारत को भव्य बनाएंगे,भारत को भव्य बनाएंगे, भारत को भव्य बनाएंगे ।। भ्रष्टाचार से मुक्त हो भारत, ऐसी अलख जगाएंगे,देश द्रोह करने वालो को, मिलकर सबक सिखाएंगे,हमें अपनी भारत माँ के, वैभवशाली गीत गूंजाएंगे,जो रचे यहाँ आतंकी रचना, भेंट मौत के चढाएंगे,सोने … Read more

हो जाओ तैयार साथियों अर्पित कर दो तन मन धन

हो जाओ तैयार साथियोंहो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयारहो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयार।। अर्पित कर दो तन मन धनमांग रहा बलिदान वतनअगर देश के काम ना आए तो जीवन बेकारतो जीवन बेकार साथियों तो जीवन बेकारहो जाओ तैयार साथियों हो जाओ तैयारहो साथियों हो जाओ तैयार।। सोचने का समय गया उठो लिखो … Read more

उतारे आरती जय माँ भारती

दिव्य धरा यह भारती, छलक रहा आनंद,नव सौंदर्य संवारती, शीतल मंद सुगंध,उतारे आरती जय माँ भारती,उतारे आरती जय माँ भारती युग युग से अनगिन धाराएँ, सेवा में तेरी,गंगा यमुना सिन्धु नर्मदा, कृष्णा कावेरी,जल जीवन से इसकी माटी, उपजाती है अन्न,नव सौंदर्य संवारती, शीतल मंद सुगंध,उतारे आरती जय माँ भारती,उतारे आरती जय माँ भारती दिव्य धरा … Read more

संवरियो जादू कर गयो मे क्या करू

लकड़ी जल कोयला भीने कोयला जल भी राखमैं विरहण ऐसी जालीना कोयला भी ना राख ।। संवरियो जादू कर गयो मे क्या करूरे कानुडो कामन कर गयो मैं क्या करू।। हलरी दुलरी और पंचलरी अरे बाजूबंद नगीनाअंगिया की कस टूटन लागी आवे अंग पसीना।। अरे भर घडो सागर से चाली सूरज अर्ग मोह दिनाबृंदावन की … Read more