टूटे साँसों की डोरी अब आकर धीर बंधाओ
विपदा ने घेरा मेरे साई अब तो आओ
टूटे साँसों की डोरी ………………
फूल तेरी बगिया के हम सब ऐसे हैं मुरझाये
चल रही देखो कैसी आंधी कुछ भी बच ना पाए
उजड़े हुए गुलशन को फिर से तुम ही बसाओ
विपदा ने घेरा मेरे साई अब तो आओ
टूटे साँसों की डोरी ………………
जो ना सोचा वक़्त ने ऐसा मुझको खेल दिखाए
रहम से तेरे कांच का टुकड़ा भी हीरा बन जाए
विनती करता टीटू अब तुम ही राह दिखाओ
विपदा ने घेरा मेरे साई अब तो आओ
टूटे साँसों की डोरी ………………