साँवरे की महफ़िल को साँवरा सजाता है

बाबा श्याम ओ बाबा श्याम,
गहरा हो नाता बाबा का जिनसे बाबा का जिनसे,
मिलने को आता मेरा श्याम उनसे,
जिनका वो साथी बन जाता है,
साँवरे की महफ़िल को साँवरा सजाता है,
किस्मत वालों से मिलने श्याम आता है।।

कृपा बरसती है जिनपे इनकी है जिनपे इनकी,
तक़दीर लिखता हाथों उनकी,
ग़म का अँधेरा सुनो छंट जाता है,
साँवरे की महफ़िल को साँवरा सजाता है,
किस्मत वालों से मिलने श्याम आता है।।

भजन सुनाते जो इनको प्यारे,
उसके परिवार के वारे न्यारे,
मंदिर सा घर उसका बन जाता है,
साँवरे की महफ़िल को साँवरा सजाता है,
किस्मत वालों से मिलने श्याम आता है।।

कुछ भी असम्भव होता नहीं है,
होता नहीं है, होता नहीं है,
महफ़िल में श्याम की होता यही है,
सबकुछ ‘सुनील’ मिल जाता है,
साँवरे की महफ़िल को साँवरा सजाता है,
किस्मत वालों से मिलने श्याम आता है।।

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