हनुमान कब आओगे समय टल रहा
शशि ढल रहा दिल जल रहाहनुमान कब आओगे समय टल रहा।। माता सुमित्रा को अब क्या कहूँगाउर्मिला की नज़ारो में दोषी रहूँगाअहम मेरी मर्यादा हाए जल रहा।। शशि ढल रहा दिल जल रहाहनुमान कब आओगे समय टल रहा।। पहले पिता ने मुझको वन में पठायावन में सिया ने मुझको मुसीबत में डाला।। लखन माफ़ करना … Read more