नाथ मैं थारोजी थारो चोखो बुरो कुटिल अरु कामी
नाथ मैं थारोजी थारो,चोखो, बुरो, कुटिल अरु कामी,जो कुछ हूँ सो थारो॥ बिगड्यो हूँ तो थाँरो बिगड्यो,थे ही मनै सुधारो। सुधर्यो तो प्रभु सुधर्यो थाँरो,थाँ सूँ कदे न न्यारो॥ बुरो, बुरो, मैं भोत बुरो हूँ,आखर टाबर थाँरो।बुरो कुहाकर मैं रह जास्यूँ,नाँव बिगड़सी थाँरो॥ थाँरो हूँ, थाँरो ही बाजूँ,रहस्यूँ थाँरो, थाँरो।।आँगलियाँ नुँहँ परै न होवै,या तो … Read more