बन्दे अब छोड़ दे हरबड़ी श्याम भजले घड़ी दो घड़ी
चाँद धुंधला गया छोर बदली हवाचंद लम्हो में बस होर होने को हैपंछी गाने को है किरणे आने को हैदुनिया फिर से नयी भोर होने को हैछोड़ जाने दे अबतक हुआ जो हुआश्याम को हर कमी तेरी मंजूर हैरात भर वो सिरहाने वो था बैठा हुआतुझको लगता था तुझसे बहुत दूर है।। बन्दे अब छोड़ … Read more