आता रहता हूँ मैं दर तुम्हारे मगर कभी तुम भी मेरे घर आया करो
आता रहता हूँ मैं दर तुम्हारे मगरकभी तुम भी मेरे घर आया करोसुनते हो सांरे सबके दिल की सदाकभी अपने भी दिल की सुनाया करोआता रहता हूँ मैं ……………….. सबपे करते हो तुम मेहरबानियांग़म के मारों की सुनकर कहानियांदेते हो इस कदर प्यार सबको मगरक्या ये कहता ये नहीं दिल तुम्हारा कभीकभी मेरी भी सुनंने … Read more