मेरे बाबा की खाटू नगरी है
जाने कितनो की किस्मत वहां जाके संवरी हैतिहुँ लोक में कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू नगरी है।। जबसे मैं खाटू जाने लगा बदली है मेरी ये ज़िन्दगीबाबा ने अपनी शरण में लिया चरणों की मुझको मिली बंदगीउलझन हो जचाहे जैसी यहाँ आके सुलझी हैतिहुँ लोक में कोई और नहीं मेरे बाबा की खाटू … Read more