ना ऐसा दरबार और ना ऐसा श्रृंगार
ना ऐसा दरबार और ना ऐसा श्रृंगारऔर ना है लखदातार बाबा श्याम धणी जैसाओ बाबा श्याम धणी जैसाना ऐसा दरबार…………………. बाबा मेरे शीश के दानी खाटू नगरी में बिराजेघर घर में ज्योत जले है दुनिया में डंका बाजेइनकी महिमा सबसे न्यारी पल में भरते भण्डारना ऐसा दरबार………………….. जो हार के खाटू आता सीने से उसको … Read more