मेरे झर झर है पांव सम्भालो प्रभु
मेरे झर झर है पांव सम्भालो प्रभु,अपने चरणों की छाँव बिठा लो प्रभु,मेरे झर झर है पांव।। माया ममता की गलियों में भटका हुआ,मैं हु तृष्णा के पिंजरे में अटका हुआ,लाला ध्रिष्णो ने गांव निकालो प्रभु,मेरे झर झर है पांव।। गहरी नदियां की लहर दीवानी हुई,टूटे चपु पतवार पुराने हुई,अब ये डुभे की नाव बचा … Read more