तन मन तरंग जागी सुध बुध भी भूल गई
तन मन तरंग जागी सुध बुध भी भूल गई Tan Man Tarang Jaagi Sudh Budh Bhi Bhool Gai तन मन तरंग जागीसुध बुध भी भूल गई।। तन मन तरंग जागीसुध बुध भी भूल गई।। मोहन की बाजी रे मुरलियाकान्हा की बाजी बसुरिया।। जो घर में रह रहा हैकलना पड़े हैं।। बहार जो जौ तो नैना … Read more