कौन है गुलशन कि जिस गुलशन में रौशन तू नहीं
कौन है गुलशन कि जिस गुलशन में रौशन तू नहीं,कौन है वो गुल कि जिस गुल में तेरी ख़ुशबू नहीं।। तू है लैला तू ही शीरीं हजरत-ए-युसूफ भी तू ही,कौन है आशिक जो तेरे इश्क़ पर मजनूँ नहीं है। अब जिलाना या मारना भी तेरा एक तमाशा है,क्यों न फिर बेख़ौफ़ हाथों में तेरे दिल … Read more