नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी
नीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारीजैसे जैसे नाच नचाए नाचे दुनियाँ सारीनीली छत के पीछे बैठा जाने कौन मदारी निराकार कोई कहता है कोई कुछ कुछ रूप बताएकोई कहे हो भेष बदलकर धरती पर आ जाएकोई कहे वो कण कण में है पर वो नजर ना आयेवो वह अनदेखा एक पहेली ना सुलझायी … Read more