मेरे दाता के दरबार में सब लोगो का खाता
मेरे दाता के दरबार में,सब लोगो का खाता,जो कोई जैसी करनी करता,वैसा ही फल पाता।। क्या साधू क्या संत गृहस्थी,क्या राजा क्या रानी,प्रभू की पुस्तक में लिक्खी है,सबकी कर्म कहानी,अन्तर्यामी अन्दर बैठा,सबका हिसाब लगाता,मेरे दाता के दरबार में….. बड़े बड़े कानून प्रभू के,बड़ी बड़ी मर्यादा,किसी को कौड़ी कम नहीं मिलती,मिले न पाई ज्यादा,इसीलिए तो वह … Read more