राघव ललन तेरे कोमल चरण कहीं कंकड़िया गढ़ी नहि जाय
राघव ललन तेरे कोमल चरण ,कहीं कंकड़िया गढ़ी नहि जायराघव ललन तेरे कोमल चरण ,कहीं कंकड़िया गढ़ी नहि जाय।। नवरा जीव चरण अरुणाय ,खेलन बिनु पग परे अकुलायनीरज नयन मोद मंगल अयन ,लाल तेरी मैं ले लूँ बलाय।। राघव ललन तेरे कोमल चरण ,कहीं कंकड़िया गढ़ी नहि जायरवि कर उदित सीस नहि छाही ,बदन निरखि … Read more