
चन्दन माथे लगाया तिलक हो गया
Chandan Mathe Lagaya Tilak Ho Gaya
चन्दन माथे लगाया, तिलक हो गया,
मेरा मन भोलेनाथ का, भक्त हो गया।।
नाम तेरा जो साँसों में, घुलने लगा,
मेरा हर कर्म ही, अब पूजा हो गया।।
तेरे चरणों में खुद को, झुका क्या दिया,
मेरा मुझमें रहा कुछ न, शिव हो गया।
भाल पर तेरे चन्दन, सजाते-सजाते,
अपने माथे पे भाग्य, लिखाते-लिखाते।
तेरी आँखों में खुद को, निहारा जो मैंने,
अपना चेहरा भी, तुझमें समाया मिला।
मैं तुझे पूजने, जब चला था प्रभु,
मुझको मेरा ही परिचय, नया मिल गया।
चन्दन माथे लगाया, तिलक हो गया,
मेरा मन भोलेनाथ का, भक्त हो गया।
शंख की ध्वनि में, तेरा बुलावा मिला,
घंटियों में मुझे तेरा, नाद सुनाई दिया।
तेरी जटाओं से गंगा, जो बहती मिली,
मेरी प्यासे हृदय को, किनारा मिला।
तेरे डमरू की धुन में, जो खोया गया,
मेरा मौन भी, शिव का भजन हो गया।
मैंने माँगा न स्वर्ग, न संसार प्रभु,
बस तेरे चरणों में, थोड़ा सा प्यार प्रभु।
तू मिला तो, सभी रास्ते मिल गए,
बिन कहे ही, मेरे भाव खिल गए।
मैंने जबसे तुझे, अपना माना प्रभु,
मेरा हर दर्द भी, प्रसाद हो गया।
तू ही श्वासों में, तू ही धड़कनों में,
तू ही बसा है, मेरी हर प्रार्थना में।
मैं अलग था कहाँ, तू अलग था कहाँ,
भेद मिटते ही, सब एक हो गया।
मैं शिवालय में, तुझे ढूँढ़ने जो गया,
शिव मेरे हृदय में, विराजे मिले।
चन्दन माथे लगाया, तिलक हो गया,
मेरा मन भोलेनाथ का, भक्त हो गया।
न मैं माँगूँ कोई वरदान अब,
न रहे कोई अभिमान अब।
तेरी इच्छा में इच्छा मेरी,
तेरी राहों में पहचान मेरी।
चन्दन की खुशबू से, जीवन महक गया,
मेरा रोम-रोम ही, शिवमय हो गया।
तेरे चरणों में खुद को, मिटा क्या दिया,
मेरा मिटना ही, मेरा मिलन हो गया।
चन्दन माथे लगाया, तिलक हो गया,
मेरा मन भोलेनाथ का, भक्त हो गया।