मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन जाऊँगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन जाकर मैं तो श्याम संग खेलूंगा
श्याम संग खेलूंगा मैं ग्वालो संग खेलूंगा
संग में उनके खेलूंगा संग में उनके खेलूंगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन में कान्हा माखन चुरायेगा
माखन चुरायेगा ग्वालो को खिलायेगा
संग में उनके खाऊंगा संग में उनके खाऊंगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन में कान्हा बासुरी बजायेगा
बासुरी बजायेगा वो सबके मन को भायेगा
मेरे भी मन को भायेगा मेरे भी मन को भायेगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन में कान्हा रास रचाएगा
वो सबको नचायेगा
संग में उनके नाचूंगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन में कान्हा गैया चऱायेगा
गैया चऱायेगा वो संग में घुमायेगा
दास समीर भी जाएगा उनके दर्शन पायेगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

वृन्दावन जाऊँगा वृन्दावन जाऊँगा
मुझको रोको ना मैं तो वृन्दावन जाऊँगा

Leave a Comment