चंचल मन बेचैन बहुत था
चंचल मन बेचैनचंचल मन बेचैन बहुत थापर जब से तेरी शरण मिली,हे श्याम तेरी करुणा द्रिष्टि से,रीझे प्यासे नैन चंचल मन बेचैन बहुत था ।। कृष्ण नामरस पीकर और कोई,रस ना मन को भाये,रसना राधे राधे रटती,अखियां श्याम समाये,जगबंदन श्री श्याम मुरारी,सोलह कला प्रभु हो श्रृंगारी,देखे बिन नहीं चैन। चंचल मन बेचैन बहुत था ।। … Read more