पीके भंग का प्याला हुआ भोला मतवाला
पीके भंग का प्यालाहुआ भोला मतवालानाचे पर्वत पे डमरू बजायकेरूप इतना भायंकर बनायके ।। हाथ त्रिशूल गले सरपो की मालात्रिनेत्र धारी धरे रूप विकराल।। सारे देवता यो दार दार के भागेरूप इतना भायंकर बनायके।। रावण ने पर्वत उठान जो चाहभोले भंडारी को गुस्सा यू आया।। रख दिया जोड़ी उसे रावण के सर पेबैठा गया भोला … Read more