छलिया छलिया कहे गुजरी छलियाँ रंग दिखावेगा
छलिया छलिया कहे गुजरी छलियाँ रंग दिखावेगा,मैं तेरी बांसुरी हर लूंगी जो तू मोहन इतरावेगा।। मीठी लागे छाज तेरी तू मटकी भर के लाइ न,प्यारी लागे तान कन्हियाँ मुरली मधुर भजाई न,माखन मिश्री खिला मनोहर रोचक तान सुनावेगा,मैं तेरी बांसुरी हर लू गी जो तू मोहन इतरावेगा।। तू मैया से करे शिकायत बिगड़ गया तेरो … Read more