तेरे दया धर्म नहीं मन में मुखड़ा क्या देखे दर्पण में
तेरे दया धर्म नहीं मन में,मुखड़ा क्या देखे दर्पण में,तेरे दया धर्म नहीं मन में,मुखड़ा क्या देखे दर्पण मे।। जब तक फूली रही फुलवारी,ओ बास रही फूलन में,एक दिन ऐसा आएगा प्राणी,ख़ाक उड़ेगी तानी में,मुखड़ा क्या देखे दर्पण मे।। तेरे दया धर्म नहीं मन में,मुखड़ा क्या देखे दर्पण में,तेरे दया धर्म नहीं मन में,मुखड़ा क्या … Read more