एक दिल मेरा जिसे मनमोहना सौ सौ बारी चोरी करता
ऐसा सज धज बैठा मेरा साँवरा,नैनों से इशारे कोई करता,एक दिल मेरा जिसे मनमोहना,सौ सौ बारी चोरी करता।। एक दिल मेरा जिसे मनमोहनासौ सौ बारी चोरी करता,सौ सौ बारी चोरी करता।। ओ पता नहीं उसे कौनसा खुमार चढ़ता है,श्याम का दीदार जो एक बार करता है,बन के दीवाना वो दर पे नाचता फिरे,ऐसा जादू साँवलिया … Read more